Attitude.

It’s just a game of destiny, to create intresting moments in one’s life, that one can travel towards future with surprises. Thoughts of future may either surprise or scare, it depends upon one’s attitude. Your attitude has the power to create your desires as well as one’s destiny.

अनुगच्छः प्रवाह।

हमारा सम्पूर्ण जीवन अद्भुत अहसासों से भरा है। हर पल सुख से पूर्ण है। बस हम प्रतिबंध न करे। यहां प्रतिबंध का अर्थ है, अपनी शर्तो के अनुरूप जीवन को चाहना।

हमे जीवन प्रवाह के संग लयबद्ध हो जाना चाहिए। जो हमे स्वाभाविकता की ओर ले जाता है। यहाँ स्वाभाविकता का अर्थ है, फूलों का खिलना, फल का पकना, नदियों का सागर में मिलना, चिड़ियों का चहचहाना, अर्थात, जो है उसे स्वीकार कर आगे बढते जाना। जीवन मे जो कुछ भी आएगा, वो जाते-जाते कुछ नए अनुभव देगा।

जीवन का हर पल अनमोल है। भूत-भविष्य के प्रतिबंधो से स्वंय को मुक्त रखकर हर पल का आनंद उठाना चाहिए। जीवन अनमोल है, मोल-भाव की सोंच से इसे नष्ट नहीं करना चाहिए।

उसने मेरा जाना आसान बना दिया।

जाना था…

चाहती नहीं थी।

कहना था…

कह नहीं सकती थी।

सुनना था…

अनसुना कर रही थी।

महशुस हो रहा था….

मानना नहीं चाहती थी।

जीवन यात्रा में ऐसे पल कम होते हैं

जब स्वप्न से यथार्थ का….मिलन होता है।

जीवन कभी ठहरता नहीं जाना ही पड़ता है।

जाना तो था…

पर जाने का मन नहीं था।

शायद उसके मन की दशा भी यही होगी।

एक दिन….

…. वो रूठ कर चला गया।

और उसने मेरा…

जाना आसान बना दिया।

पद्मा श्रीवास्तव 🍁

बेहतर

ईश्वर टूटी हुई चीज से बहुत सुन्दरता से काम लेता है!

बादल टूटते हैं तो बारिश होती है !
मिट्टी टूटती है तो “खेत” बनते हैं !
फसल टूटती है तो अनाज ” बीज” बनता है !
बीज टूटता है तो नया “पौधा” बनता है !

इसलिए जब भी अपने को टूटा हुआ महसूस करें तो समझ लीजिए ईश्वर हमारा उपयोग “बेहतर” करना चाहता है !!

तलाश

इंसान अजीब होते हैं। जब खुद के करीब होते हैं बचपना कह कर दूर चले जाते हैं। फिर उम्र भर उसी की तलाश करते हैं।
मुझे क्या चाहिए??खुशी कहां मिलेगी??

दादाजी नही छुटते, न बचपन छुटता !जहा तक दिखाई देता , पाव से नाप लेते |रोज एक नई योजना थी, रोज नए सपने |एक-एक कर सारे पेड पर चढना ,एवरेस्ट फतह करने से कम नही था |रोकने वालो की भी कमी न थी | लडकी है गीर जाएगी आख-कान टुट जाएगा फिर क्या होगा…?दादाजी के पास कई उदाहरण थे , लडकियो के पैरासुट से कुदने के एवम् एवरेस्ट फतह करने के | उनकी जीवित उदाहरण प्रधान-मन्त्री इन्दरा गान्धी थी | मै दुसरी कक्षा मे और जुगनू के.जी मे थी | उस दिन से ही हम दोनो को पता है , हमलोग आम नही खाश है |मिशन स्कूल उन दिनो सहरसा का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल था | अम्मा हमारी पढाई-लिखाई के हालात से बहुत चिन्तित रहती थी | उसपे शिक्षिका द्वारा हम दोनो बेहनो की पढाई-लिखाई के हालात जानने के बाद, अम्मा की आखो मे दर्द साफ-साफ दिख रहा था | अम्मा बहुत पढी-लिखी थी | शिक्षिकाएं अम्मा का बहुत सम्मान करती और हमारी शिकायत | हम-दोनो बहनो का मन डुबा था , आज घर पर क्या होने वाला है ? पता नही कैसे हम दोनो के दिल की पुकार दादाजी तक पहूच गई | वो स्कूल पहूच गए | शिक्षिका हमारे पढाई-लिखाई की कहानी उनसे भी कहने लगी | दादाजी उनकी बात पर थोडा भी विश्वास नही किए और फिर क्या था कह दिए हमारी पोती इन्दरा गान्धी बनेगी | स्कूल से हम दोनो को साईकिल पर दादाजी घर ले कर आए थे | ऐसा लग रहा था कही से बचा कर ला रहे थे | फिर एक दिन ऐसा भी आया जुगनू की कापी मे शिक्षिका ने दादाजी के लिए सदेश लिखा | दादाजी आपकी पोती इन्दरा गान्धी बनेगी |उन दिनो लडकिया साईकिल कम ही चलाती थी | फिर भी मैने साईकिल चलाना सिखा | अम्मा को मेरे साइकिल सिखने से समस्या नही थी, परन्तु यहा-वहा साईकिल लेकर घुमना पसन्द न था | उन्हे मेरी फिक्र थी | अम्मा का अनुशासन शख्त था , किसी बच्चे की हिम्मत नही थी, जो अम्मा की बात को काट दे | दादाजी के पास उसका भी इन्तजाम था | वो कहते आज ही साईकिल बनवाए है – पद्मा जरा चला कर बताना सही बनी है या नही | फिर अम्मा भी मान जाती थी | अम्मा को जब भी हमलोगो के साथ शख्ती करना था , दादाजी के घर से बाहर जाने का इन्तजार होता | अन्टी , अम्मा को बाहर की खबड देती थी , अम्मा ज्यादा बाहर नही निकल पाती थी | अन्टी-अम्मा मे बहुत प्यार था | वो अम्मा की मदद मे सबसे पहले थी | वो सिर्फ अम्मा की मदद करती रसोई से लेकर हर जगह | अन्टी हम दोनो से आज भी बहुत प्यार करती है | अन्टी बिचाडी, सिर्फ अम्मा को इतना बताती भाभी , बाबुजी चल गईलन | अम्मा सोचती आज किसको सीधा करना ज्यादा जरूरी है, पद्मा को या जुगनू को | मै बडी हू तो मेरा नम्बर पहले आता था और ज्यादा भी | कभी-कभी जुगनू का | आज भी जुगनू कहती है, मै तुमसे बचपन से ज्यादा समझदार हू | मै कुछ नही कहती हू अरी! तुम छोटी थी , तुमको इस बात का फायदा मिलता था |हमारे छोटे-छोटे ख्वाईश दादाजी बडे प्यार से पुरा करते थे | उनका प्यार स्मरण से कभी नही मिटने वाला है | ऊनका विश्वास मुझे हमेशा आत्मविश्वास देता है | ऊनका प्यार जो बीना किसी शर्त के था, बहुत याद आती है | आज दादाजी से सपने मे बहुत प्यार से बात हुई और बचपन याद आ गया | इसलिए मैने लिखा मेरे दादाजी मेरा बचपन !

जस्टिस

जीवन भर सिर्फ दाग देखा |
मर जाने के बाद जस्टिस,
जाने किसने ये रित बनाई |

अच्छा आदमी था, बिचाडा |
कितने सगे बन जाते है, एकाएक
मरने के बाद, मरने वाले को भी पछतावा होगा, इतना प्यार करते थे मुझसे | मै ही न जान सका, जब तक जिन्दा था नादान ही रह गया |
मरने के बाद जीवन दर्शन हुए |
अब क्या फायदा |जिन्दा रहने पर ही इन्सान समझ लो| सब खत्म हो जाने के बाद उस इन्सान के साथ जस्टिस शब्दालय से लिया सिर्फ एक शब्द है | सिर्फ मागने वालो तक ही सीमित है | वो जो चला गया जीवन से दुअःख लेकर गया | विचार, व्यवहार इन्सान को जीवन मे ही मिल जाए तो कितना अच्छा हो!! जीते जी जस्टिस मिल जाए तो अच्छा है अन्यथा....|